/ May 01, 2026

NE

News Elementor

कांग्रेस की नफरत भरी राजनीति ने संवेदनाओं और लोकतंत्र की हत्या कर दी

Table of Content

 

कांग्रेस की नफरत भरी राजनीति ने संवेदनाओं और लोकतंत्र की हत्या कर दी

 

लोकतंत्र हमें बोलने का अधिकार देता है।
विरोध करने का साहस देता है।
सवाल उठाने की ताक़त देता है।
लेकिन लोकतंत्र हमें किसी इंसान की संवेदनाओं को कुचलने का अधिकार नहीं देता।
जब किसी जीवित व्यक्ति—चाहे वह प्रदेश का मुख्यमंत्री हो या एक साधारण नागरिक—को प्रतीकात्मक रूप से “मरा हुआ” घोषित किया जाता है, उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तैरती हैं, ढोल-नगाड़ों के साथ उसकी ‘शवयात्रा’ निकाली जाती है, तो यह केवल राजनीतिक असहमति नहीं रह जाती। यह एक गहरी मानवीय क्रूरता बन जाती है।
दुर्भाग्य से, यह तरीका कुछ राजनीतिक दलों की आदत बन चुका है। विपक्ष में बैठी कांग्रेस और उसकी कुछ शाखाएँ ऐसी घिनौनी राजनीति कर रही हैं—व्यक्तियों के खिलाफ अपमान, प्रतीकात्मक मौत का तमाशा और निजी जीवन पर हमला। यह केवल राजनीतिक असहमति नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ शोर है।
यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई अपनी नफरत के चलते आपके परिवार के जीवित सदस्य की अर्थी निकाल दे, वो भी आपके ही सामने। हमारे प्रधानमंत्री देश के मुखिया हैं और मुख्यमंत्री राज्य के। ऐसे में इस तरह का घटिया प्रदर्शन केवल और केवल देश और प्रदेश को कमजोर करने और नीचा दिखाने की कोशिश है। यही लोकतंत्र की हत्या है, जो कांग्रेस जैसी राजनीति हर कदम पर करती आई है।
एक पल ठहरकर सोचिए।
उस व्यक्ति के घर में क्या बीतती होगी?
उसके माता-पिता, उसकी पत्नी, उसके बच्चे—जब वे मोबाइल स्क्रीन या अख़बार में अपने जीवित परिजन को मृत घोषित होते देखते होंगे—तो उनके दिल पर क्या गुजरती होगी?
क्या उनका दर्द राजनीति से कमतर है? क्या उनके आँसू किसी विचारधारा के आगे महत्वहीन हैं?
विरोध कीजिए। पूरी ताक़त से कीजिए।
सड़कों पर उतरिए, नारे लगाइए, सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा कीजिए—यह लोकतंत्र की खूबसूरती है।
लेकिन याद रखिए, विरोध सरकार से होना चाहिए, पद से होना चाहिए, फैसलों से होना चाहिए—किसी इंसान से नहीं।
क्योंकि जब विरोध किसी व्यक्ति की मृत्यु का तमाशा बन जाए, तब वह व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ नहीं रह जाता, वह इंसानियत के खिलाफ शोर बन जाता है।
लोकतंत्र असहमति से मजबूत होता है, अपमान से नहीं।
वह तर्क से जीवित रहता है, तिरस्कार से नहीं।
और जिस दिन हम यह फर्क भूल जाते हैं, उस दिन सवाल सत्ता का नहीं, हमारे समाज की संवेदना के मरने का होता है..

admin

admin@apnapahadapnarojgar.com https://apnapahadapnarojgar.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा शैक्षिक संवर्ग सेवा नियमावली, 2026 के प्रख्यापन को धामी कैबिनेट की मंजूरी

उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा शैक्षिक संवर्ग सेवा नियमावली, 2026 के प्रख्यापन को धामी कैबिनेट की मंजूरी     देहरादून: मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में राज्य के विकास, प्रशासनिक सुधार और जनहित से जुड़े कुल 18 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के फैसलों में कुंभ मेला व्यवस्थाओं से लेकर...

मुख्यमंत्री धामी का परिवारवाद पर हमला—कांग्रेस में अवसर सिर्फ एक परिवार तक सीमित

मुख्यमंत्री धामी का परिवारवाद पर हमला—कांग्रेस में अवसर सिर्फ एक परिवार तक सीमित देहरादून के परेड ग्राउंड से आज एक जोरदार सियासी संदेश निकला, जहां आयोजित महिला जन आक्रोश रैली में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने धाकड़ अंदाज में नजर आए। हजारों की संख्या में उमड़ी मातृशक्ति के बीच सीएम धामी ने कांग्रेस...

मुख्यमंत्री धामी खुद ले रहे चारधाम यात्रा का फीडबैक हर व्यवस्था पर पैनी नजर, यात्रियों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री धामी खुद ले रहे चारधाम यात्रा का फीडबैक हर व्यवस्था पर पैनी नजर, यात्रियों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता           केदारनाथ धाम में आज श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब भगवान बाबा केदारनाथ के कपाट विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस पावन...

मुख्यमंत्री धामी ने कहा औली की बर्फीली ढलानों से लेकर ऋषिकेश में तेज गति से बहने वाली गंगा नदी की धारा तक, मुनस्यारी की ऊँचाइयों से लेकर टिहरी झील के विशाल विस्तार तक उत्तराखण्ड का प्रत्येक क्षेत्र साहसिक पर्यटन का एक सशक्त और जीवंत केंद्र बनकर उभर रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा औली की बर्फीली ढलानों से लेकर ऋषिकेश में तेज गति से बहने वाली गंगा नदी की धारा तक, मुनस्यारी की ऊँचाइयों से लेकर टिहरी झील के विशाल विस्तार तक उत्तराखण्ड का प्रत्येक क्षेत्र साहसिक पर्यटन का एक सशक्त और जीवंत केंद्र बनकर उभर रहा है।   मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी...

आधी आबादी को अधिकार देने में सबसे बड़ी बाधा विपक्ष: धामी

  आधी आबादी को अधिकार देने में सबसे बड़ी बाधा विपक्ष: धामी मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के खिलाफ विपक्ष की वोटिंग को देश की आधी आबादी के खिलाफ अन्याय बताया है। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास और मंशा हमेशा महिला विरोधी रही है। जो...

अपना पहाड़ अपना रोज़गार हिन्दी न्यूज पोर्टल में नकारात्मक एवं सकारात्मक सामाजिक गतिविधियों को समाचार के रूप में जनता के सामने प्रकाशित किया जाता है। आप भी हमसे जुड़ सकते हैं और अपने मुद्दों को, समाचारों को और अपनी लेखनी को प्रकाशित करवा सकते हैं।

Must Read

©2023- All Right Reserved. Designed and Developed by :